सिराहने रख के एक सपना...
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कान में उसके कुछ कहना.
लम्हों से लिपटी लहरों पे,
मन मने से वो बहना...
नज़रों के संग घूमने जाना,
तो कभी काम का बहाना.
जाने ये कैसी रातें हैं,
जाने कैसा दिन है ये अपना...
सिरहाने रख के एक सपना...
वो नज्मों का संग सुनना,
मज़ाकों पर वो संग मुस्काना,
संग चलते धूप को तपना...
सिराहने रख के एक सपना...
ये दिन बटुए में बंद कर दूँ,
या ताबीज़ बना कर मैं रख लूँ.
अब काम यही रह जायेगा,
एक मीठी माला को जपना...
सिराहने रख के एक सपना...


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