Thursday, May 22, 2008

ये सड़क जहाँ से मुड़ती है...


ये सड़क जहाँ से मुड़ती है,
कहीं तुमसे जा के जुड़ती है.
कुछ तारे मिट्टी पे गिरते हैं,
ये धूल उन्ही से उड़ती है...

छोटी पड़ती है राह ये,
कुछ खींच इसे ले आता हूँ.
तुमसे कैसी है चाह मेरी,
एक खुशबू को संग संग पाता हूँ.
मेरी सड़कें इस पर मुझसे,
काली हो हो कर कुढ़ती हैं...

ये सड़क जहाँ से मुड़ती है...

तेरे बिन सड़कें ये मेरी,
फिर से सूनी हो जाती हैं.
आधी-पौनी सी दूरी ये,
फिर से दूनी हो जाती हैं.
आईने को आते हैं आंसू,
पैरों में कीलें गड़ती हैं...

ये सड़क जहाँ से मुड़ती है...

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