Wednesday, May 21, 2008

एक खूबसूरत ख्याल...

एक खूबसूरत ख्याल,
खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...
एक फेहेरहिस्त बनाते रहे,
हम तारों की रात भर.
मिलता रहा कोई हमसे,
अजनबी की तरह से.
एक पुरानी पहचान हम,
निकालते रहे रात भर...


एक खूबसूरत ख्याल,
खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...

चलता रहा रात भर,
एक रिश्ते का नामकरण.
जाने कितने जनम हुए,
और जाने कितने मरण.
रखते रहे रिश्ते के हाथ,
रिश्वत हम रात भर...

एक खूबसूरत ख्याल,

खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...

माफ़ी की अर्जी धीरे से,
चांदनी को लिख गया.
गलती से उसे तुम्हारा,
चेहरा जो दिख गया.
उन आखों में देखते रहे,
चाँद को हम रात भर...

एक खूबसूरत ख्याल,

खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...

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