Thursday, May 22, 2008

धूप की बारिश में...

धूप की बारिश में
कल तुम नहा रहीं थी,
सीदिया चढ़ते चढ़ते
कुछ गुनगुना रहीं थी…

फैली थीं तुम्हारे आसपास मुस्कुराहटें,
कुछ कह रहीं थी तुम्हारी आहटें.
देखा था छत से मैंने तुम्हें,
तुम खुद से ही कुछ बतिया रही थी…

धूप की बारिश में
कल तुम नहा रहीं थी…

मानो दिन ही में चांदनी थी खिली,
या रेशम से कहानी कोई सिली।

सूरज शरमा कर नीचे जा रहा था,
ज़िंदगी जो सीढ़ियों से ऊपर आ रही थी…

धूप की बारिश में
कल तुम नहा रहीं थी…

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Wednesday, May 21, 2008

एक खूबसूरत ख्याल...

एक खूबसूरत ख्याल,
खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...
एक फेहेरहिस्त बनाते रहे,
हम तारों की रात भर.
मिलता रहा कोई हमसे,
अजनबी की तरह से.
एक पुरानी पहचान हम,
निकालते रहे रात भर...


एक खूबसूरत ख्याल,
खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...

चलता रहा रात भर,
एक रिश्ते का नामकरण.
जाने कितने जनम हुए,
और जाने कितने मरण.
रखते रहे रिश्ते के हाथ,
रिश्वत हम रात भर...

एक खूबसूरत ख्याल,

खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...

माफ़ी की अर्जी धीरे से,
चांदनी को लिख गया.
गलती से उसे तुम्हारा,
चेहरा जो दिख गया.
उन आखों में देखते रहे,
चाँद को हम रात भर...

एक खूबसूरत ख्याल,

खटखटाता रहा किवाड़ रात भर...

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